सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

भटके राही

जब पथ भ्रष्ट हो जाये मानव, दीन ,दुखियों को तड़पाये
दीनता, दया भाव मिट जाए, प्रेम विकृति ह्रदय समाये
दोहरे रूपों में मानव जब ,रंग बदलने लग जाये
करके दया हे दयासिन्धु अब पार लगाने आ जाओ।।

गायत्री शर्मा


टिप्पणियाँ