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प्रभू के प्रति सच्ची निष्ठां

आस मेरी जहाँ से लगे न लगे ,तुझसे उम्मीदे मेरी सभी बंध रही
संकटों के पलों में जग संग छोड़ दे,मेरे अंग-संग हे मालिक बस तू ही रहे
हर घड़ी हो उमंगों उम्मीदों भरा, मेरे दामन में कष्टों के कांटे बिछे
पार कर जाऊंगी हर चुनौती को मैं, शर्त ये है दुआओं में तूँ ही रहे।।

गायत्री शर्मा

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