ये कवि हैं जनाब कोइ प्रयागी कोई गढ़वाली बताता है
नाम के साथ नए प्रयोग कर कोई शख्स यमदूत बताता है ।।
चल पड़ते हैं कारवां इनके पीछे मगर क्रांति रुकती नहीं ।
कोई मेघदूत सा गरजता कोई श्रृंगार का जानकार बताता है।।
सर नेम बदलने की हालत महज औरतों की नहीं ।
वो शौहर अपनी शिनाख्त शायर बदनाम बताता है।।
कितने नाम हैं नाम के पीछे भी एक नाम रहस्यमई चुनाव ।
मेरे मन से निकले अल्फाजों की खूबी हर शख्स बताता है।।
काव्य रस को अलंकारों की चाशनी में डुबोए कोई रसिक ।
कभी बरसता है कोई बादल बन तो खुद को कोई लुल बताता है ।।
दर्द अल्मोड़ा भी कतारों में है खड़े सिमटे गीत गजलों में ।
शिला सा टकराता कोई शख्स गम का सौदागर बताता है।।
फिर चलता है एक नया सीरीज इंटरव्यू का ’ गुंजन ’ ।
पेननेम का लोचा साक्षात्कारकर्ता क्लियर बताता है ।।
खुशियों से भरा हो लाखों पल ,कहीं नैन नमी से युक्त रहे झरझर बरखा जो बून्द पड़े , फिर भी अंगना हो अनल तले नभचर ख़ग दाना- दाना को ,अन्न नीर बिना जैसे तरसें विचरे नभः में पंखे लहरा , उन्मुक्त गगन से दूर चले जो क्षितीज दिखे पंखों के परे ,भानू किरणों से तपता रहा अंकित जो करूँ दुःख का बादल ,चहुँ ओर घिरे पर भीग रहे ना उड़ पाया न ठहर सका, हर तरफ ही नीड़ तलाश रहा बेबसी के काले बादलों ने ,सपनों की उड़ानें रद्द कर दी चंचल ऋतुओं का क्या कहने,बेवक्त मिजाज बदल बैठे बेमानी लगे सावन भी उसे ,वो मयूर नहीं जो थिरक सके पंखें भीगी नम नैन हुए, किस ओर दिशा में नीड़ बसे। गायत्री शर्मा
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