आत्मदाह की कल्पना , घातक है जीवन के लिए
खुद के खातिर ना सही तो झोंक दो ये जीवन जनमानस के लिए
यह प्राण मात्र हवा का एक झोंका ही है , देह में समाया हुआ
जिसके बिना शरीर स्थूल है , दुनिया की हर खुशी और दौलत शून्य है
हर वो ख्वाब जो देखे हैं तुमने कभी पूरे होने को , जद्दोजहद करते हो
सपनों के टूटने का दर्द जब झेल नहीं पाते तब होते हो तुम हताश
उठो ! इस खामोशी को तोङो ये जायज नहीं खुद को खोना
अवसाद की आंधियों में बहते जाना , हृदय पर निराशा का भार उठाना
कुछ तो ऐसा करो , समेट लो अपनी समस्त ऊर्जा सकारात्मक सोच की ओर
वजह तलाशो दुनिया में किसी के जीने की वजह बनो तुम !!
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