पीड़ा हो ,कठिनाई हो ,दलदल हो या, हो अंगारे
तूँ रुकना नहीं, तू थकना नही, चाहें बदरी घनघोर घिरे
ऐ मीत(मन) मेरे सुन गीत मेरे,अंधेरों से क्या डरना रे
ना हार तू मन चल साथ मेरे, मैं (ईश)साथ तेरे क्या डरना रे
है यकीन तेरा मुझपर जितना ऐसा ही हो हर वक्त तेरा
मेरे नाम के माला में रम जा जैसे चन्दन सरीसृप जड़ा
छम छम कर के धुन गाता जा ले बांध नुपुर अलमस्त रहे
संकल्प ले तू ना डिगे कभी तेरे लक्ष्य से बढ़कर क्या है रे
किरदार तेरा, अंदाज तेरा, हर शब्द तेरा ,मिश्री घोले
प्रीति दिल की ,हो इतनी हरी ,हो हिना की जैसे लालिमा
उगते सूरज ,ढलते चंदा, ले आये प्रातः एक भोर नई
हो वक्त भले विपरीत मगर गिर-गिरकर उठ-उठ कर चलो
क्या छूट गया, क्या बीत गया, जो रात गई, सो बात गई।।
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