हर रास्ते अंजाने हैं हर मोङ पर कटिनाई है
किससे कहें हम कहाँ जाए जीना बङा दुष्वार है
जिन रास्तों पर तूँ चला हमको भी ऐसा ज्ञान दे
चलकर जहाँ के पार हम निज धाम पहुंच जाएँ प्रभु
आशा की लौ जलने लगी इच्छाएँ सब मिटने लगी
दुख दर्द की काली घटा धिरे धिरे छटने लगी
नफरत लिए कैसे जिएँ तुम प्रेम से सींचो हमें
देकर के अपना आशीष अब भव पार कर देना हमें।।
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