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प्रश्नोत्तर काव्य - कालिया नाग को मारने के बाद कृष्ण द्वारा दावानल से गाय और गोपों की रक्षा



 प्रश्नोत्तर काव्य - कालिया नाग को मारने के बाद  कृष्ण द्वारा दावानल से गाय और गोपों की रक्षा


 ब्रज मंडली भय त्रस्त है  अग्नि प्रकोप भारी पड़ी , 

इक कालिया का भय  मिटा संकट निकट दूजा खड़ा।।


अन्न जल  बिन त्रस्त हैं सब ग्वाल बाल श्रीकृष्ण संग ,

 शैय्या धरा तट यमुना का बेसुध सोएं सब ही बेढंग ।।


हाय ! ज्वाला ये दहकती ढाए कहर चहुं ओर से ,

लपटें लिपटतीं फैलती  ललकारते प्रभु जोर से।।


करुणानिधान लीला अपार बल शौर्य दाऊद, कृष्ण का,

केवलमात्र ग्वालों की आस अग्नि बुझे  वन क्षेत्र  का ।।


बाल भक्त सब ग्वालन पीड़ित  कर रहे त्राहिमाम, 

आंख मूंदकर ग्वाले सभी कृष्ण को किए प्रणाम।।


नीलकंठ  सम दयालु गिरधर धरें  अग्नि मुख मांहि ,

पलक झपकते ग्वाले , गईयाँ भांडीर वट पर जाहिं।।


रामावतार में सीता सुरक्षा किए थे अग्निदेव ,

मुख में आश्रयस्थान लिए कृतज्ञ रहेंगे सदैव।।


श्री कृष्ण है त्रिलोकेश्वर सत- रज - तम गुण से परे 

माया अपार महिमा अपार सुर - असुर- नर जिसने रचे ।।


धर्मो रक्षती रक्षित का  ज्ञान पुंज  प्रज्वलित करे ।।

वही दैत्यों  को पग रौंदते व्रजवासी सब अचरज  करे ।। 


चरणकमल हृदय में धार ग्वाल बाल कहें मित्र ,

इसी स्नेह को पाने खातिर  प्राणों से  है प्रीति ।।


 दावानल से हुए सुरक्षित ग्वाल बाल सबहीं गईयां ,

मान गए  प्रभु सखा हमारे देव करत  हमरी अगुवइयां।।

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