पोलिटिक्स
पोलिटिक्स
पोलिटिक्स
जिधर देखो उधर पोलिटिक्स
ओह ये क्या स्कूल में पोलिटिक्स
प्रशासन में पोलिटिक्स
नेताओं में पोलिटिक्स
घर घर में पोलिटिक्स
दौलत के लिए बेटे का पोलिटिक्स
बूढे माँ बाप को तीर्थ यात्रा
भेजने का पोलिटिक्स
हर रोज बने नई योजनाएँ
ओह रिश्तो में भी पोलिटिक्स
अब क्या कहें लगता है जैसे
षङ्यंत्र है पोलिटिक्स
नहीं ये कहना गलत होगा...
जिंदा है हर दिल में एक अच्छा इंसान
जुल्म के खिलाफ जो करे
इंसानियत की बात
हर गली मोहल्ले में कोई तो होगा
एक अच्छा इंसान
गलत नही है राजनीति
गलत नहीं षङयंत्र
राष्ट्र हित के लिए किया गया हो
गर कोई षङ्यंत्र
जुल्म को मात देने का
दुश्मन को परास्त करने का
समझ गए हम राजनीति
हर पहलू से देखें तो यह
केवल षङयंत्र नही है
जीने की "कला" है राजनीति
गायत्री शर्मा
खुशियों से भरा हो लाखों पल ,कहीं नैन नमी से युक्त रहे झरझर बरखा जो बून्द पड़े , फिर भी अंगना हो अनल तले नभचर ख़ग दाना- दाना को ,अन्न नीर बिना जैसे तरसें विचरे नभः में पंखे लहरा , उन्मुक्त गगन से दूर चले जो क्षितीज दिखे पंखों के परे ,भानू किरणों से तपता रहा अंकित जो करूँ दुःख का बादल ,चहुँ ओर घिरे पर भीग रहे ना उड़ पाया न ठहर सका, हर तरफ ही नीड़ तलाश रहा बेबसी के काले बादलों ने ,सपनों की उड़ानें रद्द कर दी चंचल ऋतुओं का क्या कहने,बेवक्त मिजाज बदल बैठे बेमानी लगे सावन भी उसे ,वो मयूर नहीं जो थिरक सके पंखें भीगी नम नैन हुए, किस ओर दिशा में नीड़ बसे। गायत्री शर्मा
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