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मृत्यु के बाद का सफ़र -स्वप्नावस्था



 स्वप्न में देखा आज मैने

वो अदभुत  अदृश्य मंजर
तुम खङे थे मेरी राहो में
जब कदम रखा कुछ समझ ना पाई
तब तुमने मुझे आदेश दिया
इस राह पर चलकर वापस आना
भूल से भी कहीं भटक ना जाना
ये मार्ग बङा ही दुर्लभ है
हर शख्स यहाँ से गुजरता नहीं
जो पात्र है  मेरी कृपा दृष्टि का
सिर्फ वही यहाँ चल पाता है
सचमुच मैं खुश किस्मत थी
जो तुमने मुझे आदेश दिया
बढती चली गई एक बिंदु पर
 जहाँ पहुँच कर सोचा यात्रा समाप्त हो गई
परंतु.........
तुमने फिर से पुकारा मुझे और मैं उठ खङी हुई
 बढती चली गई किचङ.गङ्ढों,
 नालों एवं संकरी गलियों से,
गुजरते दुर्गम पथ पर
आखिर मैं वापस आ गई तुम्हारे पास
जब  देखा  सन्नाटा पूछा कुछ लोगों से
सुना चले गए हैं सभी
इस सभा में अब कोई नहीं
मैं कोंसती रही खुद को काश
बिना विराम लिए बढती चली गई  होती!
तो शायद तुमसे फिर मुलाकात  होती
खैर अब वो सलोना स्वप्न टूट गया
आँखे खुली तो समझ गई
 वो मेरे खुदा का भेजा पैगम्बर  था
जिसने मुझे खुदा के करीब लाना चाहा
और मैं अनजानी राहों  में ,
बस बाधाओं से  घिरती गई
काश ये स्वप्न हकीकत होता
तब मृत्युपरांत का ये अनुभव 
मैं हकीकत में बयाँ करती !

  "गायत्री शर्मा"

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