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गुरु पूर्णिमा दो शब्द

 ज्ञानदाता है गुरु, अति श्रेष्ठ कर्म पहचान है
दीदार ईश्वर का कराते, गुरू पूजा कर उन्हें रिझाते।।


 गुरु प्रेरणा है शिष्य का ,  उर में ज्ञान का पुंज भर
गुरु मेटते अज्ञान तम, दिल से करें उनको नमन।।


पावन दिवस गुरुपूजा है, युग-युग से यही विधान है
गुरु-शिष्य का शुभ परंपरा, दर्शाए ज्ञान महत्वता।।


 मानव से  महामानव तक , अलख जगाते हैं गुरुवर
ज्ञान,ध्यान,शुभ कर्म का, मर्म बताते हैं गुरुवर।।


नफरतों का सिलसिला खत्म हो , हर प्राणी में सद्भाव हो
मानवता की धुरी पर रखकर , विश्व का कल्याण हो
यही ज्ञान देते हैं गुरु , सुसंस्कृतियों  का पाठ पढा
बैठें सहृदय गुरु चरणों में, मिट जाए अज्ञानता गहन।।



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