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मुक्तक




★प्रेम ही प्रेम है जग मे  न पालो नफरतें दिल में
पशु पक्षी वृक्ष फूलों से सीखो कुछ  हुनर खुद में
विधाता ने विविधता से सजाया है जहाँ को खुद
आदायगी करके ऋण अपना करो जन्नत जहां को तुम।।

★: प्रीत में ख्वाहिशें लाखों , जिंदगी है बहुत छोटी
हसरतें दिल जो पाले हैं , नहीं उनका ठिकाना है
यूं घुट घुट कर भी जीना क्या क्यों इतना गम बटोरे हो
कि खुलकर आज को जी लो नहीं कल का भरोसा है ।।

★जो तुमको दिल से चाहे तो उसे दिल से लगा लेना
ये रिश्ते कांच के जैसे खनक लगने नहीं देना
झुका लो खुद को थोड़ा तुम अगर जो बात बन जाये
गलतफहमी में अक्सर सच्चे रिश्ते टूट जाते हैं ।।

 राजनीति को गंदली देखी नेताओं का आचार दिखा
गुंडागर्दी, फीताशाही, भाई भतीजावाद दिखा
मोदी अटल कलाम के जैसा नेता  नहीं हुआ
देख लिया है बदलता भारत स्वच्छ राजनीति अभियान।।


 कह दो हवा थम जा जरा , निष्प्राण हो जाए जहाँ
विधि के विधान स्वभाव से , हर जीव  गुण धरता यहाँ ।।
ये मीन भी चंचल बड़ी, प्रकृति वश गुण धर रही
समझे जो इसके विधान को , समझे मेरी हर भावना
 अंतिम मुकाम तेरा कहाँ , क्यों कर रहा अभिमान है
नहीं जाना संग में दुनिया का , कोई साज और समान है
तूने कमाया जो नाम दौलत, शौहरतें किस काम की
रिश्तों के महफ़िल से जुदा ,तूँ अंत राख का ढेर है ।।

★प्रकृति पर

प्रकृति है मनोहारी ,छटा इसकी बड़ी न्यारी
बिना विभेद कर राही को तृप्ति  भरपूर देती है
जो कुदरत ने नहीं रखा भेदभावो की सीमाएं
तो क्यों करते हो मज़हब से अलग इंसान इंसा को ।।

★मुश्किलों पर
 बाधाएं लाख  जीवन मे जो आये तो उसे सहना
किसी महफ़िल में अपना गम नुमाइश तुम नहीं करना
मुकद्दर में मिला जो गम उसे हंसकर उठा लो तुम
ये दुनिया पीर का दरिया है इसमें बह नहीं जाना।।

★विश्वव्यापी कोरोना पर

 कोरोना जंग है भारी, छुपे शत्रु सा है जारी
 कि राजा,रंक,भिखारी,सभी पर दंश है भारी
कोरोना काल में दुनिया मृत्यु का ग्रास बनकर है
अकारण जानें जाने का , चीन है घोर अपराधी ।।

★कारगिल विजय दिवस पर
सेना के पराक्रम को देश की अखंडता को  मातृभूमि रक्षकों को कोटिशः नमन है
दुश्मन देशों के कुचाल को कुचलकर सेना ने नया जो इतिहास बनाया है
कठिन था कारगिल चोटी कूच करना ,पाकिस्तानी गीदड़ों का घुसपैठ भारी था
मार्ग तोतोलिंग ,टाइगर हिल  से सेना ने  पाकिस्तानी गीदड़ों को पुनः घेर लिया था
वायु सेना ,थल सेना , और केंद्र नेतृत्व द्वारा  भारत ने मारक की क्षमता बढ़ाया था
हार नहीं माना सेना ने जो दमखम पाया हारी बाजी जितने के शौर्य को नमन है ।।
कारगिल  युद्ध की सफलता पर बलिहारी भारतीय अमर जवानों को नमन है।।

★ राष्ट्र प्रेम पर

देश सेवा से बढ़कर दुनिया में कोई प्रीत नहीं होती 

 जवानों से बड़ी हिम्मत नहीं किसी और में होती  

थर्राते हैं गीदड़ दुश्मन , हिन्द के सैन्य दल बल से 

 उन्हें क्या  मौत मारेगी कफ़न सिर बाँध जो निकले ।।


★सेना पर राजनीति

सत्ता के लोभी जन सीखो सेना से आचार ,धरम

शांति दूत बनकर जन जीवन ,आपदा में जो राहत दें 

शत्रु से टकराते हैं तब नींद चैन की सोते हो तुम

बंद करोे तुच्छ राजनीति सेना के वीर जवानों पर ।।


★त्योहारों पर

त्यौहार आते हैं , बहारें साथ लाते हैं

मतभेद दिल के रिश्तों के सब दूर होते हैं 

गर अपने जन कुटुंब सभी जो साथ साथ हों

त्योहारों का मिलकर सभी आनन्द लेते हैं ।।


★वतन की हिफाजत

देश प्रेम की लौ जले , दिलों मे हो सद्भाव

लोकतंत्र का मंदिर है , भारतवर्ष महान 

दंगो फसादों कुकृत्यों से देश की आन ना जाए

वतन की रक्षा में चाहे ,जान भले ही जाए ।।


★रक्षाबंधन पर 

वतन के रक्षक हैं अपने उन्हें क्यों भूल जाते हैं 

देश का गौरव है इनसे , इन्हें ही भूल जाते हैं

ये सारे तीज औऱ त्योहारों की रंगत इन्ही से है

तिलक कर बांध दो राखी ,प्रथम सीमा के प्रहरी हैं।।


★अहंकार पर

पद प्रतिष्ठा मान बड़ाई ,का हो भाव प्रधान जहाँ 

चुगलीबाजी और धृष्टता, से मानव हो भ्रष्ट जहाँ

ज्ञान गर्व से महा विद्वता , सर्वश्रेष्ठता अहम् पले

विनय नम्रता दया करुण ,सदवृतियों का हो अंत वहाँ।।



★राम मंदिर भूमिपूजन पर

सदियों से उलझा ,विवादित , नीतियां थी बेकार 

अभिलाषा सब पूर्ण हुई , अयोध्या  नगरी निहाल 

राम जन्म जहाँ भूमि पूजन , अनुष्ठान  हुआ जारी 

मंदिर निर्माण पर गर्वित देश , हृदय आनन्द है भारी ।।


★धर्म-कर्म पर

राजनीति , अध्यात्म का यदि समन्वय होय

कर्म , प्रार्थना शक्ति में विज्ञान समन्वित होय

गूढ़ ज्ञान ,उर तेज से नीतियाँ सफल हो जाये

भ्रष्ट आचरण  खाक हो यह देश समृद्धि पाये ।।


★बुराई का अंजाम

शकुनी और मंथरा सहित , कुचालों का कपाट

जो भी इसमें फंस गया ,बाहर नहीं निकास

दु:शासन ,शिशुपाल सा ,अन्याय शतक हो पार

बचने के आसार  नहीं ,इतिहास साक्ष्य दोहराय।।

  • भक्ति पर 

करतार विश्व स्वम्भू ईश्वर ,प्राण प्रिय भक्तों के रक्षक
दीनबन्धु कृपासिंधु ,मायापति कृष्ण नन्द- नन्दनम
करती हूँ बारंबार वंदन ,जग के संचालक हे  प्रभु
 विष्णु स्वरूपं रूद्र रूपम , प्रजापती अति - सुंदरम
तुझको नमन जगदीश्वरं ,हे स्वयं भू  परमेश्वरम।।

★हौसलों पर

 तूफानों की कश्ती बड़ी भारी विपत्ति पास हो
आंखों के आगे विवशता के पर खुले अंदाज हों
उड़ने दो उन परों को जो  बाधाओं ने फैलाये हैं
प्रबल इच्छा से क्षितिज को  तुम नया आयाम दो ।।

★सत्य का अक्श

बुराई करने वालों का कोई ईमा नहीं होता
सत्य की राह में  रोड़े लगाने को बहुत मचले
बुझा ना पाये चिंगारी जिसे सच ने लगाया है
तभी  दुनिया मे सच्चाई से अक्सर लोग डरते हैं ।।

★भ्रष्टाचार पर

छापे पर छापे पड़ते हैं रेड सीबीआई वालों के
वीआईपी वीवीआईपी करें आर्डर सीबीआई को
कहीं न कहीं छिपा डर है जहन में राज खुलने का
मुनाफाखोरों की अकलें गई  थी घास चरने को ।।

★ बड़ी बातें छोटा दिल

करते हैं जो बातें पहाड़ों और मीनार शिखर जैसी
कथनी करनी से झूठे , नख शीष तलक  उज्ज्वल दिखते
जैसे बगुला हंस वेश धर नहीं गुणों को गह पाये
ऐसे ही मक्कार लोग सरीसृप सा विष ना तज पाते ।।

★राम जन्म भूमि पर

अयोध्या राम जी का गढ़ , हिंदुत्व की बड़ी निशानी है
जो हिस्से में मिला हमको बहुत उपकार भारी है
कि सालों से विवादों में  घिरा निर्णय अधूरा था
बनेगा राम मंदिर अब हुई पूरी तैयारी है ।।

★बनारस के तट पर

बनारस की छटा न्यारी चमकता घाट का पानी
धर्म संस्कृतियों का है अनूठा दृश्य दुनिया में
सैलानी जब यहां आते करें अर्चन विनय कर जोड़
कि भारत की  अनूठी शान दुनिया ने स्वीकारा है ।।

★ चिंता क्यों करना

डिप्रेशन में मत पड़ना  करो सस्पेंड चिंता को
व्याकुलता में  घिरो जब भी पुकारो अपने ईश्वर को
नहीं है  जगत ये अपना सभी स्वार्थ  के  रिश्ते हैं
कि अंत तक मर  रहे जिन पर सफर में छूट जाएंगे ।।

★रिश्तों का बदलता रूप

 कि रिश्तों का समुंदर है बहुत खारा उफ़ानों सा
कभी नदिया कभी चट्टान सा भारी  हृदय कुचाल
बरसते है जो अहमों के गरजते से कभी बादल
कभी शीतल कभी उफ़ान से रिश्तों के बंधन हैं।
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